अगस्त 2018 की बेस्ट लोकप्रिय कहानियाँ

सुंदर गुलाब के फूलों वाली नई चादर पर बैठी नवविवाहिता आयुषी अपने फ़ोन में कुछ फोटो देख रही थी.
तभी उसके पति नलिन कमरे में आये, आते ही अपनी दुल्हन से बोले- हाय जान! क्या कर रही हो फोन में? आज हमारी पहली रात है, सुहाग रात है.

आयुषी- वो मेरी सहेली मानसी ने मेरी विदाई की कुछ फोटो भेजी हैं जो उसने अपने मोबाइल से ली थी! आप भी देखो न…ये भावुक कर देने वाली हैं! देखो ना!
आयुषी ने अपना फोन अपने पति की ओर बढ़ाया.
लेकिन नलिन फोटो देखे बिना ही बोला- हाँ… हाँ… ठीक हैं. आज हमारी फर्स्ट नाईट है तो… वो बादाम वाला दूध तुमने लाकर रखा या नहीं?
आयुषी- वो असल में कल रात से मैं ठीक से सोई नहीं थी ना… मेरे सर में दर्द हो रहा था तो मम्मी जी ने मुझे केटल में कॉफी दी थी, अभी तो मैंने बस वही पी है… आप भी लेंगे क्या कॉफ़ी?
आयुषी उत्तर की प्रतीक्षा किये बिना एक मग में कॉफ़ी उड़ेलने लगी.
“न… नहीं… तुम पीयो…! वो रीत है ना दूध का गिलास…”

नलिन के मना करने पर आयुषी ने खुद कॉफ़ी का मग उठा लिया और पीने ही लगी थी कि तभी उसने अपने पति के हाथ में कुछ देखा, चौंकते हुए आयुषी ने पूछा नलिन से- ये तुम्हारे हाथ में क्या है?
नलिन हिचकिचाते हुए- ये… ये… ये सफ़ेद चादर है, इसे बिस्तर पर बिछा लेते हैं!
“अरे आज हमारी रंगीन रात है तो ये सफ़ेद चादर क्यों… तुम्हें यह रंगबिरंगी फूलों वाली चादर अच्छी नहीं लग रही क्या? ज़रा देखो तो… कितने सुन्दर गुलाब के फूल बने हुए हैं! और तुम यह सफ़ेद…!”

नलिन बोला- देखो आयुषी, मुझे मालूम है कि आज की रात हमारी सुहागरात है, यह हमारी यादगार लम्हों से भरी रात होने वाली है, इस रात के लिए हमने कितने सपने देखें हैं, लो इस चादर को बिछाओ!
आयुषी- लेकिन क्यों? ये क्या जरूरी है?
नलिन- समझने की कोशिश करो आयुषी… यह जरूरी होता है! सुहागरात पर सफ़ेद चादर जरूरी होती है।
“क्या मतलब है तुम्हारा?”
“अरे यह एक जरूरी शगुन होता है आयुषी! समझो ना!”
“क्यों?”

“आयुषी… क्या तुम कुछ भी नहीं जानती?”
“क्या नहीं जानती मैं? लेकिन तुम सफ़ेद चादर को बिछाने पर इतना जोर क्यों दे रहे हो नलिन?”
“आयुषी… तुमको पता होना चाहिए कि आज की रात तुमको अपने आप को साबित करना है।”
आयुषी ने कहा- क्या साबित करना है? खुल कर बताओ ना?

नलिन- आयुषी… मेरा मतलब तुम्हारी वर्जिनिटी…वो वो मेरा मतलब तुमने शादी के पहले किसी के साथ स… सस्स… सेक्स…?
“ओह माय गॉड… हे भगवान… यह क्या वाहियात बात कर रहे हो तुम नलिन?”
आयुषी एक गहरी सांस लेती हुई बोली- अब समझ में आई मुझे तुम्हारी यह सफेद चादर वाली पहेली!

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बहू की मेहरबानी, सास हुई बेटे के लंड की दीवानी

मैं चुत का बहुत रसिया इंसान हूँ। मेरी बहुत सी कहानियाँ भी आप सबने पढ़ी हैं और पसंद भी की है।
मेरी पिछली कहानी थी
दोस्त की बुआ के घर में तीन चूत

मेरी कहानियाँ पढ़ कर मेरी एक महिला मित्र बनी जिसका नाम है रमिता खन्ना, दिल्ली की रहने वाली है। वो दिल्ली में अपने पति और सास के साथ रहती है। वैसे तो उसके पति हिमाचल के रहने वाले हैं पर नौकरी दिल्ली में होने की वजह से वो अब दिल्ली के दिलशाद गार्डन एरिया में कहीं रहते हैं।

अब आते है असली कहानी पर! यह कहानी मेरी नहीं है बल्कि रमिता के बताये गये किस्से पर आधारित है। वो बहुत दिनों से कह रही थी कि उसकी भी एक कहानी है और मैं उसे हिंदी में लिख कर आप सब को भेजूँ। पर समय ही मिल रहा था। आज तीन दिन की छुट्टी मिली तो सोचा कि आज यह शुभ काम कर ही दिया जाए। बस लैपटॉप उठाया और बैठ गया रमिता की कहानी लिखने।

रमिता 22-23 साल की जवान और खूबसूरत बदन की मलिका, कद पाँच फीट तीन इंच, बदन का एक एक अंग साँचे में ढला हुआ। अभी 8 महीने पहले ही उसकी शादी अशोक खन्ना से हुई जो दिल्ली की एक कंपनी में काम करता है।
अशोक भी 24 साल का हट्टा कट्टा नौजवान है। दिखने में सुन्दर और लम्बे मोटे लंड का मालिक। रमिता बहुत खुश थी अशोक से शादी करके। अशोक भी उसकी हर रात को रंगीन बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ता था, खूब मस्त चुदाई करता था वो रमिता की।

परिवार का एक और अहम् सदस्य था अशोक की माँ साधना… उम्र 45 के आसपास पर बदन इतना मस्त कि अच्छी अच्छी कुँवारी लड़कियाँ भी पानी भरती नजर आयें। कद पाँच फीट, चुचे ऐसे जैसे हिमाचल की पहाड़ियाँ। पतला सपाट पेट मस्त उभरे हुए कूल्हे।
आप सोच रहे होंगे कि रमिता की कहानी में मैं उसकी सास की तारीफ क्यों लिख रहा हूँ? तो बता दूँ कि इस कहानी की मुख्य पात्र अशोक की माँ और रमिता की सास ही है।

कहानी की शुरुआत तब हुई जब एक दिन दोपहर में रमिता ने अपनी सास के कमरे से सिसकारियों की आवाज सुनी। उसने दरवाजे में से झाँक कर देखा तो दंग रह गई। उसकी सास साधना सिर्फ पेटीकोट में पलंग पर लेटी थी और एक हाथ की दो उँगलियों से अपनी चुत को रगड़ रही थी वहीं दूसरे हाथ से अपनी कड़क चुचियों को मसल रही थी। शायद वो झड़ने वाली थी तभी उसके मुँह से सिसकारियाँ फूट रही थी।

रमिता का ध्यान साधना की चुत पर गया तो देखा की साधना की चुत एकदम क्लीन शेव थी जैसे आज ही झांटें साफ़ की हो। पानी के कारण लाइट में चमक रही थी साधना की चुत। रमिता को आशा नहीं थी कि उसकी सास इतनी कामुक होगी।

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साठा पे पाठा मेरे चाचा ससुर

मैं हरियाणा में रहती हूँ, 27 साल की शादीशुदा औरत हूँ। मेरी शादी हो गई है इसलिए अपने लिए औरत शब्द का इस्तेमाल कर रही हूँ, वरना लड़कपन तो मुझमें अभी भी बहुत है। आज भी मैं बच्चों जैसे चुलबुली हरकतें करती हूँ, इसी लिए अपने मायके और ससुराल में सबको प्यारी लगती हूँ।
मायका तो खूब भरा पूरा परिवार है मेरा, मगर ससुराल में सिर्फ मेरे पति और मेरे ससुर ही हैं। ससुर भी सगे नहीं हैं, मेरे पति के चाचा हैं, 54 साल के हैं मगर आज भी बहुत ही चुस्त दरुस्त और तन्दरुस्त हैं। वो एक रिटायर्ड सरकारी अफसर हैं। शादी के कुछ साल बाद ही उनका अपनी पत्नी से तलाक हो गया था, उसके बाद उन्होंने नौकरी से रिटाइरमेंट ले ली, दूसरी शादी नहीं की, वो हमेशा अकेले ही रहे।

उनकी आमदनी ब्याज पर पैसा देने से और गाँव में थोड़ी बहुत खेती बाड़ी से है, एक दो समाज सेवी संस्थाए हैं जिनमें वो कभी कभार जाते रहते हैं, वरना सुबह और शाम की सैर के अलावा वो सारा दिन घर में अपने कमरे में बैठे टीवी देखते रहते हैं या साहित्यक किताबें पढ़ते रहते हैं।
चाचा अपने आप को वो बहुत फिट रखते हैं और बेशक सर के बाल और बड़ी बड़ी मूंछों के बाल आधे से ज़्यादा सफ़ेद और थोड़े से काले हैं, मगर फिर भी वो बहुत जँचते हैं।
और मैं उन्हें कभी चाचाजी तो कभी पापा कहती हूँ.

लो आप सोचोगे कि मैं अपना छोड़ कर कहाँ, चाचा का बखान करने बैठ गई।

अपने बारे में भी बता देती हूँ। शादी से पहले मैं अपने स्कूल और कॉलेज के एक बहुत ही होशियार स्टूडेंट थी, मैंने बी कॉम फ़र्स्ट डिवीज़न में किया है। मगर घर में माहौल थोड़ा टाईट होने के वजह से कभी कोई बॉयफ्रेंड नहीं बना पाई, पापा और भाई लोग से डर ही बड़ा लगता था।

मेरी सहेलियों के बॉयफ्रेंड थे, बस उनसे उनकी कहानियाँ सुन कर और रात को अपने बिस्तर पर उनके बॉय फ्रेंड से अपने खयालों में लिपट कर, सिरहाने को ही अपनी आगोश में कस कर भर कर अपना मन बहला लेती थी। अक्सर अपनी सहेलियों से सुनती उन्होंने कैसे अपने बॉयफ्रेंड से सेक्स किया और क्या क्या मज़े किए, मगर मैं तो सिर्फ अपना मन मसोस कर ही रह जाती।

जैसे जैसे मैं जवान हो रही थी, मेरा बदन भर रहा था, मेरे मम्मे, मेरे कूल्हे भारी होते जा रहे थे, देखने में भी बहुत सुंदर हूँ मैं, मेरी कई सहेलियों के बॉयफ़्रेंड्स ने मुझे भी लाइन मारी, कई अपने दोस्तों से मेरी सेटिंग की बात करी, मगर मैंने कभी हाँ नहीं कही।

इसी लिए शादी से पहले तो सच कहूँ मैं सिर्फ ब्लू फिल्मों में ही मर्द का लंड देखा था। जब ब्लू फिल्में देखती, तो खूब अपनी चूत मसलती, खूब पानी छोड़ती, बड़ा दिल मचलता कि कोई मुझे भी जम कर चोदे, खूब पेले, रुला दे मुझे, मगर ऐसा कोई मौका शादी से पहले मुझे नहीं मिला।

फिर जब मैं बी कॉम के फाइनल ईयर में थी तभी मेरी सगाई हो गई। मेरे पति भी देखने में बहुत ही आकर्षक हैं, पहली नज़र में ही मुझे इनसे प्यार हो गया। उसके बाद सगाई से लेकर शादी तक हम कई बार मिले, एक बार एक साथ मूवी भी देखने गए, मगर मेरे पति ने कोई जल्दबाज़ी नहीं की, सिर्फ मुझे कुछ पप्पियां जफ़्फियां ही मिली, मगर मैं इस से भी बहुत खुश थी कि जो एक बॉयफ्रेंड का सपना मैं देखती थी, वो मेरा मंगेतर पूरा कर रहा था।

इन्होंने पहले ही कह दिया था कि जितना ज़्यादा प्रेम हम अब कर लेंगे, उतना ही सुहागरात का मज़ा कम हो जाएगा।
मैंने भी अपनी सभी इछाएँ अपनी सुहाग रात तक रोक ली, दबा ली। अब 25 साल से दबा रखी थी, तो कुछ दिन और सही।

फिर मेरी शादी हुई और सुहागरात भी मनाई। सच में वो मेरी ज़िंदगी की बड़ी हसीन रात थी, वो मैं फिर कभी आप को बताऊँगी। पहले मैं आपको अपने चाचा ससुर के साथ अपना किस्सा सुनाती हूँ।

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जाटणी के साथ पहला लेस्बियन अनुभव

मैं राजस्थान की रहने वाली हूँ, मेरी उम्र बाईस साल है लेकिन यह बात तब की है जब मैं अठारह साल की थी। मैं बारहवीं पास करके नई नई कॉलेज में आई थी। हमारे कॉलेज में मेरी एक सहेली बन गई जिसका नाम सपना चौधरी था। वो सीकर से थी जबकि मैं बीकानेर से।
मेरे चाचा शहर में एस डी एम थे इसलिए मैं सरकारी गाड़ी में कॉलेज आती थी। मेरी क्लास में राजपूत और ब्राह्मण लड़कियां मेरे से दूर दूर रहती थी क्योंकि मैं दलित थी लेकिन सपना का व्यवहार मेरे प्रति बहुत अच्छा था। वो मेरी पक्की सहेली बन गयी. हम दोनों बिल्कुल साथ साथ रहने लगी, साथ साथ कैंटीन जाती, खूब बातें करती, खूब मस्ती करती कॉलेज में!

मुझे स्विमिंग पूल में नहाना शुरू से ही बहुत अच्छा लगता था। मेरे चाचा के सरकारी बंगले में स्विमिंग पूल बना हुआ है, जिसमें मैं और चाचा अक्सर नहाया करते थे।
क्या सोच रहे हो मेरे प्यारे पाठको… हाँ, मैंने और मेरे चाचा साथ साथ स्वीमिंग पूल में स्वीमिंग करते थे और साथ साथ नहाते थे, अठखेलियाँ करते थे. बहुत याराना है मेरा मेरे चाचा के साथ!

एक बार मेरी सहेली सपना और मैं पिंक पर्ल (वाटर पार्क) घूमने. मस्ती करने गई। पिंक पर्ल में पहुंचकर मैंने और सपना ने स्विमिंग पूल में नहाने के लिए अपने कपड़े उतारे। हम दोनों जैसे ही पानी में उतरी, मेरी शमीज भीग कर मेरे 32 साइज उरोजों से चिपक गई और मेरे चूचुक दिखाई देने लगे क्तोंकी उसके नीचे मैंने ब्रा नहीं पहनी थी. ठंडे पानी से मेरे निप्पल खड़े हो चुके थे जो पारदर्शी समीज में साफ दिखाई दे रहे थे।

मेरी सहेली सपना मुझे घूरने लगी, मुझे उसकी आंखों में हवस नज़र आने लगी। हालांकि मैं अपने चाचा, उनके ड्राइवर और अपने कुछ टीचर्स और क्लासमेट्स से स्कूली दिनों में ही कई बार चुदवा चुकी थी लेकिन किसी लड़की के प्रति मैंने तब तक कुछ सोचा नहीं था। मुझे किसी लड़की के साथ कोई लेस्बियन सेक्स का तजुर्बा नहीं था. हालांकि मैं लेस्बियन वीडियो खूब देखती थी और मुझे सब कुछ पटा था कि लेस्बियन लड़कियां क्या क्या और कैसे करती हैं.

सपना ने मेरे पास आकर मेरी 34 साइज गांड को पानी के अंदर मसलना शुरू कर दिया। मैं उस जाटणी की हिम्मत देख कर हैरान रह गई। वो पानी के अंदर मेरे सेक्सी बदना को सहलाने लगी. इससे मेरी सांसें तेज हो गई, मुझे काफी डर लगा रहा था कि ये लड़की यहाँ खुले में क्या कर रही है, कुछ समझ नहीं आ रहा था मुझे, लेकिन मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मैं चाह रही थी कि ये मुझे मसल डाले!

उसने एक हाथ आगे कर पानी के अंदर से मेरी चूत के अंगूरदाने को मसल दिया, मैं उछल पड़ी। मैं उसकी बांहों में फिसल रही थी। उसके मसलने से मुझे जाटणी की ताकत का अहसास हो रहा था। काफी देर तक हम पानी में मस्ती करते रहे, बीच बीच में उसने मौक़ा देखकर मेरे गुलाबी होंठों को पीना शुरू कर दिया तो मैं सिसकार कर बोली- आह सपना! यार यहां ये सब नहीं, कहीं और चलें यार!
मैं बहुत गर्म हो चुकी थी। अब मैं अपने जीवन के पहले लेस्बियन अनुभव को पाने के लिए बेसब्री से इंतज़ार करने लगी।

हालात की नजाकत को समझते हुए सपना ने भी मेरी बात की हामी भरी और हम दोनों अपने बदन को तौलिये से पौंछ कर, अपने कपड़े पहन कर वापस आकर गाड़ी में बैठ गई।
मैंने पूछा- कहां चलें?
तो वो बोली- मेरा एक दोस्त है रणधीर सिंह शेखावत… जिसका यहां हैरिटेज होटल है, उसी में चलते हैं।

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प्रीति भाभी का कैज़ुअल सेक्स

मैं दिल्ली में रहती हूँ। अभी मैं सिर्फ 27 साल की हूँ, देखने में बहुत सुंदर हूँ, और जितना मेरा चेहरा सुंदर है, उससे ज़्यादा मेरा जिस्म सुंदर है।
शादीशुदा हूँ, मेरे पति बहुत प्यार करते हैं।
पर मेरी कमजोरी यह है कि एक मर्द के प्यार से मेरा पेट नहीं भरता। या यूं कहूँ के मेरे पेट के नीचे, दोनों टाँगों के बीच जो सुराख है वो नहीं भरता। इसलिए मैं अक्सर इस तरह के लोगों की तलाश में या मौकों की तलाश में रहती हूँ, जब मैं अपने जिस्म की तपिश को किसी मर्द के गरमागरम रस से ठंडा कर सकूँ।

इसी चक्कर में मैंने बहुत से लोगों से सेक्स किया है, ये सब किस्से आप मेरी पहले छप चुकी कहानियों

मेरी कामुकता, मेरे तन की प्यास
मेरी चूत का टैटू
आदि में पढ़ चुके हैं। मगर कहानी भी मैंने वो लिखी हैं, जिनमें मुझे लगा कि ये पढ़ के लोगों को मज़ा आयेगा।

सेक्स तो मैंने बहुत किया है, मगर हर सेक्स को कहानी के रूप में नहीं ढाला जा पाता। मैं ढूंढती हूँ कि मेरी कहानी में कुछ खास हो, सबसे अलग। इसलिए कुछ खास घटनाओं को ही कहानी का रूप देकर आपके पढ़ने के लिए भेजती हूँ।

तो लीजिये आज का किस्सा भी पढ़िये।

एक दिन मेरे पति और मैंने शाम को बाहर आऊटिंग का प्रोग्राम बनाया। प्रोग्राम यह था कि पहले बाहर किसी डिस्को में जाकर एक दो वोड्का के पेग मारेंगे, थोड़ा डांस वांस करेंगे, फिर किसी बढ़िया होटल में डिनर करेंगे और मौज मस्ती करते हुये आधी रात के बाद ही घर वापिस आएंगे।

अब जब डिस्को में जाना था, तो मैंने गहरे लाल रंग की ड्रेस पहनी, ऊपर से भी गहरे गले की और नीचे भी छोटी सी टाइट स्कर्ट। मतलब मैं चाह कर भी अपना दिख रहा क्लीवेज और नंगी जांघें किसी से छुपा नहीं सकती थी। बहुत ही बदन उघाडू सी ड्रेस थी। यह पोशाक मेरे पति ने मुझे मेरे जनमदिन पर तोहफे में दी थी मगर पहनी आज।

सुर्ख लाल लिपस्टिक, गहरे लाल रंग की नेल पोलिश, मैचिंग मेकअप।
मेरे पति का कहना था- यार आज तो बहुत कयामत ढा रही हो, बच के रहना कहीं कोई इस हुस्न को चुरा न ले।
मैंने कहा- आपकी बीवी हूँ, संभाल के, बचा के रखना, अगर आपने मुझे छोड़ कर किसी और का दामन पकड़ा तो सोच लो, मैंने भी नीचे से पेंटी नहीं पहनी है।
मेरे पति हंस दिये और बोले- सच में? दिखा?

मैंने अपनी टाँगें खोल कर दिखाई, नीचे बिना चड्डी के शेव की हुई गुलाबी चूत देख कर वो बोले- साली, मादरचोद, तू तो चुदाई की पूरी तैयारी करके चली है। कोई बात नहीं… आज रास्ते में ही कहीं गाड़ी रोक कर तेरी चूत ठंडी करूंगा।
मैं भी खुश हो गई कि चलो आज ओपन एयर सेक्स का मज़ा लूँगी।

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